Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार

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Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार – दोस्तों, हम हर साल ‘मदर्स डे’ Mother’s Day मनाते हैं. माँ, आई, अम्मा, माता, मम्मी, चाहे कितने ही नाम हो पर माँ का नाम आते ही हमारे आंखों मे अलग सी चमक आ जाती है. इस नाम मे प्यार और ममता छुपी हैं. भगवान् का दूसरा नाम ही माँ हैं. वो कहावत हैं ना की भगवान् हर जगह नहीं जा सकता इसलियें माँ को बनाया है. यही कारण है की आज हम Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार आपसे शेयर कर करने वाले है. तो चलिए शुरू करते है.

Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार

Chanakya Niti For Mother - माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार
Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार

राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्रपत्नी तथैव च।
पत्नीमाता स्वमाता च पञ्चैताः मातर स्मृताः॥

राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, पत्नी की माँ, तथा अपनी माँ, ये पांच प्रकार की माँ होती है।

नान्नोदकसमं दानं न तिथिर्द्वादशी समा ।
न गायत्र्याः परो मन्त्रो न मातुर्दैवतं परम् ॥

अन्न और जल के दान के समान कोई नहीं है । द्वादशी के समान कोई तिथि नहीं है । गायत्री से बढ़कर कोई मन्त्र नहीं है। माँ से बढ़कर कोई देवता नहीं है।

माता यस्य गृहे नास्ति भार्या चाप्रियवादिनी।
अरण्यं तेन गन्तव्यं यथारण्यं तथा गृहम् ॥

जिसके घर में माँ न हो और स्त्री क्लेश करने वाली हो , उसे वन में चले जाना चाहिए क्योंकि उसके लिए घर और वन दोनों समान ही हैं।

माता शत्रुः पिता वैरी येनवालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा ॥

बच्चे को न पढ़ानेवाली माँ शत्रु तथा पिता वैरी के समान होते हैं । बिना पढ़ा व्यक्ति पढ़े लोगों के बीच में कौए के समान शोभा नहीं पता।

कामधेनुगुणा विद्या ह्ययकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशा विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥

विद्या कामधेनु के समान गुणोंवाली है, बुरे समय में भी फल देनेवाली है, प्रवास काल में माँ के समान है तथा गुप्त धन है।

राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्रपत्नी तथैव च।
पत्नीमाता स्वमाता च पञ्चैताः मातर स्मृताः॥

राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, पत्नी की माँ, तथा अपनी माँ, ये पांच प्रकार की माँ होती है।

ऋणकर्ता पिता शत्रुमाता च व्यभिचारिणी।
भार्या रुपवती शत्रुः पुत्र शत्रु र्न पण्डितः॥

ऋण करनेवाला पिता शत्रु के समान होता है| व्यभिचारिणी मां भी शत्रु के समान होती है । रूपवती पत्नी शत्रु के समान होती है तथा मुर्ख पुत्र भी शत्रु के समान होता है।

माता च कमला देवी पिता देवो जनार्दनः।
बान्धवा विष्णुभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्॥

जिस मनुष्य की माँ लक्ष्मी के समान है, पिता विष्णु के समान है और भाइ – बन्धु विष्णु के भक्त है, उसके लिए अपना घर ही तीनों लोकों के समान है।

सत्यं माता पिता ज्ञानं धर्मो भ्राता दया सखा।
शान्तिः पत्नी क्षमा पुत्रः षडेते मम बान्धवाः

सत्य मेरी माँ है, ज्ञान पिता है, भाई धर्म है, दया मित्र है, शान्ति पत्नी है तथा क्षमा पुत्र है, ये छः ही मेरी सगे- सम्बन्धी हैं।

मातृवत् परदारेषु परद्रव्याणि लोष्ठवत्।
आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति सः पण्डितः॥

अन्य व्यक्तियों की स्त्रियों को माँ के समान समझे, दूसरें के धन पर नज़र न रखे, उसे पराया समझे और सभी लोगों को अपनी तरह ही समझे।

Last Word : दोस्तों आज हमें आपसे Chanakya Niti For Mother – माँ पर चाणक्य के अनमोल विचार शेयर किये है और हमें आशा है आपको यह अनमोल विचार पसंद आये होगे. अगर आपका कोई सुझाव है तो कृपया comment करके हमें बताये साथ ही Chanakya Niti For Mother को अपन मित्रो से शेयर जरुर करे. हमारे letest पोस्ट की जनकारी fb पर प्राप्त करने हेतु हमारे facebook page को like जरुर करे.

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