Chanakya Niti For Students – विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार

Chanakya Niti For Students – विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार – दोस्तों आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थी जीवन की कई नीतियों के बारे में बताया है। आज हम जानेंगे विद्यार्थी पर आचार्य चाणक्य के 10 अनमोल विचार. हर विद्यार्थी को उन नीतियों का ध्यान रखना चाहिए। अगर चाणक्य की बताई गई नीतियों का पालन किया जाए तो विद्यार्थी मनचाही सफलता पा सकता है। तो चलिए शुरू करते है.

Chanakya Niti For Students – विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार

Chanakya Niti For Students - विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार
Chanakya Niti For Students – विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार

सुखार्थी चेत् त्यजेद्विद्यां त्यजेद्विद्यां विद्यार्थी चेत् त्यजेत्सुखम्।

सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिनः सुखम्॥

यदि सुखों की इच्छा है, तो विद्या त्याग दो और यदि विद्या की इच्छा है, तो सुखों का त्याग कर दो । सुख चाहनेवाले को विद्या कहां तथा विद्या चाहनेवाले को सुख कहां ?

कामं क्रोधं तथा लोभं स्वाद शृङ्गारकौतुकम्।

अतिनिद्राऽतिसेवा च विद्यार्थी ह्याष्ट वर्जयेत्॥

काम, क्रोध, लोभ, स्वाद, शृंगार, कौतुक, अधिक सोना, अधिक सेवा करना, इन आठ कामों को विद्यार्थी छोड़ दे ।

यथा खनित्वा खनित्रेण भूतले वारि विन्दति।

तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रुषुरधिगच्छति॥

जैसे फावड़े से खोदकर भूमि से जल निकला जाता है, इसी प्रकार सेवा करनेवाला विद्यार्थी गुरु से विद्या प्राप्त करता है ।

विद्यार्थी सेवकः पान्थः क्षुधार्तो भयकातरः।

भाण्डारी च प्रतिहारी सप्तसुप्तान् प्रबोधयेत॥

विद्यार्थी, सेवक, पथिक, भूख से दुःखी, भयभीत, भण्डारी, द्वारपाल – इन सातों को सोते हुए से जगा देना चाहिए ।

एकमेवाक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।

पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चाऽनृणी भवेत् ॥

जो गुरु शिष्य को एक अक्षर का भी ज्ञान करता है, उसके ऋण से मुक्त होने के लिए, उसे देने योग्य पृथ्वी में कोई पदार्थ नहीं है।

अनागत विधाता च प्रत्युत्पन्नगतिस्तथा।

द्वावातौ सुखमेवेते यद्भविष्यो विनश्यति॥

जो व्यक्ति भविष्य में आनेवाली विपत्ति के प्रति जागरूक रहता है और जिसकी बुद्धि तेज़ होती है, ऐसा ही व्यक्ति सुखी रहता है । इसके विपरीत भाग्य के भरोसे बैठा रहनेवाला व्यक्ति नष्ट हो जाता है ।

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्या अल्पं च कालो बहुविघ्नता च ।

आसारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

शास्त्र अनेक हैं, विद्याएं अनेक हैं, किन्तु मनुष्य का जीवन बहुत छोटा है, उसमें भी अनेक विघ्न हैं । इसलिए जैसे हंस मिले हुए दूध और पानी में से दूध पि लेता है और पानी को छोड़ देता है उसी तरह काम की बातें ग्रहण कर लो तथा बाकी छोड़ दो

अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम्।

दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम्॥

जिस प्रकार बढ़िया-से बढ़िया भोजन बदहजमी में लाभ करने के स्थान में हानि पहुँचता है और विष का काम करता है, उसी प्रकार निरन्तर अभ्यास न रखने से शास्त्रज्ञान भी मनुष्य के लिए घातक विष के समान हो जाता है ।

शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्यया विना।

न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे॥

जिस प्रकार कुत्ते की पुंछ से न तो उसके गुप्त अंग छिपते हैं और न वह मच्छरों के काटने से रोक सकती है, इसी प्रकार विद्या से रहित जीवन भी व्यर्थ है । क्योंकि विद्याविहीन मनुष्य मूर्ख होने के कारण न अपनी रक्षा कर सकते है न अपना भरण- पोषण ।

नास्ति कामसमो व्याधिर्नास्ति मोहसमो रिपुः।

नास्ति कोप समो वह्नि र्नास्ति ज्ञानात्परं सुखम्॥

काम के समान व्याधि नहीं है, मोह-अज्ञान के समान कोई शत्रु नहीं है, क्रोध के समान कोई आग नहीं है तथा ज्ञान के समान कोई सुख नहीं है ।

Last Word : दोस्तों आज हमने आपसे Chanakya Niti For Students – विद्यार्थी पर चाणक्य के 10 अनमोल विचार शेयर किये है. हमें आशा है की यह चाणक्य निति आपको सफलता प्राप्त करने में काफी महत्वपूर्ण साबित होगे. आपको Chanakya Niti For Students यह कैसे लागे यह हमें जरुर बताये. अगर आपका कोई सवाल अथवा सुझाव हो तो कृपया comment करके हमें जरुर बताये. हमारे लेटेस्ट अपडेट facebook पर पाने के लिए हमारे facebook page को like जरुर करे.

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